4 wipzy Desi Sex story की प्रशंसिका की बुर की पहली चुदाई-1

"यह कहानी wipzy Desi Sex story की एक पाठिका की है, पाठिका ने अपनी बुर की पहली चुदाई अपने टीचर से कैसे करवाई, ये सब उसने लेखक को यानि मुझे बताया, मैं इस घटना को उसी के शब्दों ढाल कर पेश कर रहा हूँ।

यह सेक्स कहानी पढ़ कर आप सब कुछ जान जाएँगे!

wipzy Desi Sex story के लेखक से मुलाकात और…

यह कहानी वैसे तो मेरे साथ की है पर लिखा इसे मेरी एक फैन ने है जिसका नाम ऋचा झा है। ऋचा 22 साल की बिंदास लड़की है जो दिल्ली से है, वो इतनी बिंदास लड़की थी कि मुझे खुद आश्चर्य हो रहा था, मेरे को उसने एक मेल भेजा था और मेरी पंजाबी गर्ल वाली कहानी की बहुत तारीफ करी थी।

मैंने उसको रिप्लाई भी दिया था। करीब 3 महीने तक हम दोनों इमेल्स से बात करते रहे.. और फिर हैंगआउट से बात करना शुरू किया, वो पूरा दिन हैंगआउट पर रहती, कभी कभी तो मुझे बहुत गुस्सा आता उस पर क्योंकि मेरा काम और ऑफिस सब डिस्टर्ब हो जाता था… पर प्यार भी आता था उस पर.. क्योंकि वो मेरी एक फैन थी.. मासूम सी थी वो.. पर कुँवारी नहीं थी..

मैं चाहूंगा की आगे की बात आप ऋचा से सुनें…

हाय दोस्तो, मैं ऋचा झा हूँ, दिल्ली से हूँ, 22 साल की हूँ, मैं wipzy Desi Sex story की शौक़ीन नहीं हूँ। मेरी किसी सहेली ने मुझे अल्हड़ पंजाबन लड़की संग पहला सम्भोग का लिंक भेजा था, मेरी वो सहेली इस साइट के बहुत बड़ी फैन है, वो रोज़ यहाँ कहानी पढ़ने आती है… मैंने जब राहुल जी की वो कहानी पढ़ी तो मेरे होश उड़ गए!

सच बोल रही हूँ, इतनी बारीकी से कहानी को लिखा कि मैं पागल हो उठी.. और फिर रोज़ रोज़ उस कहानी को मैंने कई बार पढ़ा.. और फिर मैंने राहुल जी को एक मेल किया।

मैं बहुत ही बिंदास लड़की हूँ, मेरा अंदाज़ बहुत निराला है, लड़के मेरे इसी अंदाज़ पे मर जाते हैं, पर मुझे लड़कों को तड़पना बहुत पसंद है, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है (क्योंकि बॉयफ्रेंड बन के कुछ दिन में चोदने की बात पे आ जाते है लड़के, और दुहाई प्यार की देंगे कि जान प्यार में ये सब तो होता है, फिर यदि हमने एक बार टांग खोल दी तो उस दिन के बाद सारा प्यार खत्म… प्यार तब तक ही रहता है जब तक लड़की अपनी बुर न दे!)

मैं अपने रूप से हर किसी को दीवाना बना लेती हूँ, मेरी चूची 34B, कमर 28 और चूतड़ 34 है… मैं कुंवारी नहीं हूँ.. मेरे को सेक्स का ज्ञान मेरे हर्ष सर ने दिया मुझे सिर्फ और सिर्फ हर्ष सर ने ही भोगा है।

तब मैं सिर्फ 18 की थी, उस वक़्त मैं बहुत मासूम सी थी, सम्भोग क्या होता है, यह नहीं पता था। हाँ सेक्स के नाम पर बस यह पता था कि कोई लड़का यदि चूची दबाये या बदन को सहलाये तो मजा आता है और लड़के चूची को छूने के लिए कुछ भी कर सकते हैं पर जैसे ही मैं सेक्स के बारे में और उससे मिलने वाले मजा के बारे में जाना, तब से हर्ष सर क्या और कोई लड़का मुझे नहीं भोग सका..
शायद कच्ची उम्र में हर किसी से गलती हो जाती है.. मेरे से भी हुई!
पर इस सेक्स ज्ञान ने मुझे बहुत बिंदास बना दिया।

मेरा रंग गोरा है दूध सा.. बड़ी बड़ी काली काली आँखें.. गर्दन तक मेरे बाल.. लाल मेरे होंठ, सपाट पेट, चिकनी और लंबी भरी भरी टाँगें.. मस्त भरी हुई जांघ… मैं आपको अपनी पहली चुदाई की बात सुनाती हूँ कि कैसे मेरी पहली चुदाई हुई।

तब मैं 18 साल की थी और 12 की स्टूडेंट थी, मेरी क्लास में अटेंडेंस काफी कम थी और मेरे इंटरनल पेपर में भी मार्क्स कम आये थे। मैंने हर्ष सर से संपर्क किया, हर्ष सर मेरे क्लास टीचर थे और कुँवारे थे, हर्ष सर करीब 28 साल के मस्त एथेलेटिक बॉडी वाले थे। स्कूल की हर लड़की उनकी दीवानी थी, चौड़ी छाती, गठीला बदन, भरी हुई बाहें, कुल मिला के हर्ष सर एक मस्त और जवान मर्द थे और मैं भी उनकी दीवानी थी।

मुझे अपनी जवानी पे बहुत गर्व था, मेरे चेहरे की मासूमियत में हर कोई खो जाता था… मुझे मेरे गोरे गाल, पतली कमर और चौड़ी गांड पे बहुत यकीन था, मैंने हर्ष सर को टीज़ करके फायदा उठाने की सोची… तब मैं सेक्स के अधूरे ज्ञान को पूरा ज्ञान समझती थी… सेक्स ज्ञान मतलब होंठ चूसना, चूची दबाना, कमर सहलाना… जैसा कुछ.. पर मैं कितना गलत थी, यह मुझे बाद में पता चला।

तो मैंने उनसे संपर्क किया और रिक्वेस्ट की कि मेरा फेवर करें।

उस दिन जब मैं उनके स्टाफ रूम में गई तो अपनी शर्ट का ऊपर का बटन खोल दिया था, मेरी सफ़ेद ब्रा साफ दिख रही थी, मेरी गोरी गोरी स्किन से मेरी चूची के बीच की दरार साफ साफ वो देख सकते थे।
उस दिन मैंने अपनी पुरानी स्कर्ट भी पहनी थी जिसमें मेरी जाँघें भी दिख रही थी।"
"सर के चेहरे से साफ दिख रहा था कि वो मेरे रूप के जाल में फंस रहे हैं.. सर की अभी शादी नहीं हुई थी और वो एक कमरे के मकान में रहते थे, शाम को ट्यूशन भी लेते थे।
मैंने उनको कहा कि मुझे वो अलग से पढ़ा दें।

वो मान गए… मैंने भी एक कातिल से मुस्कान उनको दे दी और उनकी बाँहों को जोर से पकड़ कर थैंक्स बोली- सर आप जो कहेंगे वो मैं करुँगी, बस आप मुझे पास करवा दो.. जिसके सहारे मैं बोर्ड का एग्जाम दे सकूँ। जो फीस मांगोगे, वो मैं दूंगी।

मैं जानती थी कि मेरा जादू उनके ऊपर चल गया है, सोचा थोड़ी ऊपर से जिस्म सहलवा लूंगी, मेरी चूची दबा लेंगे सर… तो मेरा काम बन जायेगा, मुझे फिर भी कहीं न कहीं डर था कि कहीं किसी को पता न चल जाए या मेरे घर में किसी को पता न चल जाए!

पर मैं गई उनके पास… शाम को मैं खूब सज़ के उनके घर गई.. शार्ट पैंट और टीशर्ट पहन कर मेरी गोरी मसल जांघ और मेरी 32 साइज की चूची साफ दिख रही थी, पिंक टी में से ब्लैक ब्रा साफ दिख रही थी।

मैं भी ऐसे टाइम पर गई जब उनकी क्लास ख़तम होने को थी। थोड़ी देर में सारे स्टूडेंट चले गए।

अब मैं और हर्ष सर घर में अकेले थे, मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था, शरीर में कम्पन था डर के मारे!
हर्ष सर की तो और भी हालत ख़राब थी… उसका मुँह खुला का खुला रह गया मेरे को देख कर… शायद मैं उस दिन बहुत हसीं और सेक्सी लग रही थी.. मेरे निप्पल डर से बिल्कुल खड़े हो गए थे जो टी से साफ साफ दिख रहे थे।

तभी मेरी नज़र उनके पैंट पर गई.. वहाँ कुछ उभार सा था, अचानक हर्ष सर ने वहाँ हाथ लाकर कुछ एडजेस्ट किया- बताओ, क्या पढ़ना है?
मैं- सर मैथ्स!

‘ओके…’ बोल कर वो मुझे चैप्टर समझाने लगे.. फिर मुझे कुछ सवाल देकर वो बोले- तुम ये सवाल करो, तब तक मैं कॉफ़ी बना के लाता हूँ।
मैं- अरे सर आप क्यों बनाओगे.. मैं बना कर आप को पिलाती हूँ!
कह कर मैं किचन की तरफ बढ़ गई और उनको कुछ बोलने का मौका नहीं दिया।

फिर सर ने मेरे पीछे आकर खड़े होकर ऊपर से कॉफ़ी और चीनी निकाल कर दी.. तब उन्होंने अपना लंड मेरी गांड में लगा दिया।
मैंने सिहर कर उनके लंड से अपनी गांड सटा कर ग्रीन सिग्नल दिया।

सर भी थोड़ी देर तक वैसे ही खड़े रहे… फिर वो अंदर चले गए।
मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा थी कि आगे कैसे टीज़ करूँ!

और इसी सोच में मैं कॉफ़ी कप में निकालने लगी… तभी बेख्याली में अंत में कुछ कॉफी किचन स्लैब में गिर कर मेरी जांघ में गिर गई।
मैं जोर से चिल्लाई- आई ओह्ह्ह्ह्ह माँ!

सर दौड़ कर आए, तब तक मैं जलन के मारे फर्श पर बैठ गई थी… मेरी जांघ लाल हो गई थी। वैसे मुझे इतना दर्द नहीं हो रहा था जितना मैं नाटक करके रो रही थी।
घबरा कर सर मेरे पास आए, पूछा- क्या हुआ?
मैं बोली- कॉफ़ी गिर गई मेरे ऊपर, बहुत जल रहा है सर…

‘ओह्ह… मैं अभी दवा लगा देता हूँ!’ कह कर मुझे उठाने लगे पर मैं दर्द से चिल्ला कर फिर से बैठ गई।
अब हर्ष सर के सामने कोई और दूसरा रास्ता नहीं था, तब उन्होंने मेरी कमर से मुझे उठा लिया मैं भी अमर बेल के तरह उनसे लिपट गई, मेरी बाहें उनकी गर्दन पर.. और मेरी चूची उनकी छाती से दब गई थी… उनकी और मेरी सांसें एक दूसरे को उत्तेजित कर रही थी।

यह मेरा पहला पुरुष स्पर्श था।
तभी मुझे मेरी बुर से कुछ निकलता प्रतीत हुआ, मेरी पेंटी गीली होने लगी..

कुछ ही पल में सर ने मुझे दीवान पर लिटा दिया, सर दवा ले कर आए और बोले- लो लगा लो!
मैं बोली- सर, आप लगा दो?
सर थोड़ी से हिचकिचाहट के बाद मेरे पैर अपनी गोदी में रख कर वहीं दीवान पर बैठ गए.. उंगली में दवा लेकर मेरे लाल निशान पर लगाने लगे..

उनके स्पर्श से ही मेरी सिसकारी छूट गई- आआह्हः
सर- क्या हुआ?
मैं शर्म से आँख बंद कर बोली- कुछ नहीं, आप लगाओ, बहुत अच्छा लग रहा है.. ठंडा ठंडा!
सर को भी थोड़ी हिम्मत आ गई.. शायद वो समझ गए कि मैं कोई बुरा नहीं मानूँगी… और फिर वो पूरी हथेली से मेरी जांघ सहलाने लगे।

मैं तो आसमान में उड़ रही थी, मेरे शरीर में सनसनी से दौड़ रही थी बुर से कुछ निकलता हुआ लग रहा था। सर का हाथ अब आसानी से मेरी चिकनी जांघ पर फिसल रहा था, मेरा जिस्म उनके स्पर्श से सिहर रहा था और मैं आनन्द के सागर में थी कि मेरी आंख बंद थी।

अचानक उनका हाथ जांघ से ऊपर की तरफ बढ़ता हुआ लगा, मैं साँस रोक कर अगले पल का इंतज़ार करने लगी.. वो मेरी बुर के पास पहुंच कर रुक गए.. शायद वो मेरा रियेक्शन देख रहे थे!
पर मैं आंख मूंद कर अगले पल का इंतज़ार कर रही थी।"
"कि उनका हाथ मेरे शॉर्ट पैंट के अंदर जाता महसूस हुआ और मैं सिहर उठी…
फिर उनका हाथ मेरी पेंटी को छूने लगा।

सर में मेरी ओर देखा, हम दोनों की आंख मिली और मैंने शर्म से आंखें बंद कर ली, सर भी समझ चुके थे कि मेरी तरफ से कोई विरोध नहीं होगा।
अब वो मेरी बुर की दरार पे सहला रहे थे!

‘आह्हः उफ्फ्फ्फ़ सर… प्लीज मत करो ओह्ह्ह सर अच्छा लग रहा है.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह्ह्ह!’

तभी उनकी उंगलियों ने मेरी पेंटी के अंदर प्रवेश कर मेरी गीली बुर को सहला दिया। मेरे बुर को गीली पाकर समझ गए कि मैं चुद जाऊँगी।

पर चुदना क्या होता है, यह तो मुझे पता नहीं था उस वक़्त.. और मैं उनके स्पर्श को ही सेक्स समझ रही थी- उफ़्फ़ आह्ह्ह सर!
सर मेरी ओर झुक गए और दूसरे हाथ से मेरी टी के अंदर से मेरी सपाट बैली को सहलाने लगे।

मैं दोनों हाथों का स्पर्श सह नहीं पाई.. और मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया।
तब मुझे पता नहीं था कि बुर भी झड़ती है! पर आज पता है और उन पलों को याद करके आज भी सिहर जाती हूँ।"
"राहुल के कमरे में पहुँच कर मैं सीधे वाशरूम चली गई, इधर उसने वाइन और कुछ खाने को मंगवा लिया। मैं जब बाहर आई तो राहुल वाइन और खाने के सामान को टेबल पर लगा रहा था।
ऋचा- ये क्या है?
राहुल- कुछ नहीं, आज की शाम को और हसीन बनाने का इंतज़ाम!

फिर उसने कमरे की सारी लाइट बंद कर दी और कुछ कैंडल्स जला दी, 2 कैंडल वाइन की टेबल पर और 1-1 कैंडल बेड के दोनों सिरहाने पर, और 1 ड्रेसिंग टेबल पर.. मैं इस खुशनुमा माहौल के लिए तैयार नहीं थी.. पर जैसा आप सब जानते हैं कि राहुल कितना रोमांटिक है.. तो ऐसा तो होना ही था।

कमरे में कैंडल्स की हल्की पीली रोशनी में राहुल ने वाइन का गिलास मेरी तरफ बढ़ाया, सच कहूँ बिंदास तो मैं थी पर वाइन मैंने कभी नहीं पी थी, एक हिचकिचाहट के साथ गिलास हाथ में ले लिया।

तब उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ा और मुझे लेकर ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने ले गया, फुल शीशे में मैं पूरी दिख रही थी, राहुल ने मुझे पीछे से बाँहों में लिया और बोला- यह शाम हमारी दोस्ती के नाम!
कह कर मेरे गिलास वाले हाथ को पकड़ कर अपने होंटों से लगा लिया और अपना गिलास मेरे होंटों को..

दोस्तो, आप सब कभी इस पोज़ को अज़माना… कितना रोमांटिक थे वो पल.. कैंडल लाइट में चमकता हमारा जिस्म एक दूसरे के हाथों ने वाइन पीते हुए!
वाइन का टेस्ट मुझे अच्छा लगा, कुछ एक सिप के बाद राहुल ने मेरे गर्दन में किस करना शुरू किया, उसके एक हाथ में गिलास था और दूसरा हाथ मेरे पेट पर था, एक तरह से मैं उसकी बाँहों में थी!
मैं आँखें बंद करके उस रोमांटिक माहौल का आनन्द उठाने लगी।

राहुल का स्पर्श एक ऐसा सुखद अहसास था कि मैं उसमें खो सी गई थी। राहुल एक प्रेमी की तरह मेरे जिस्म के हर कोने में अपने हाथों के स्पर्श की मौजदगी का अहसास करा रहा था, उसका हर स्पर्श मुझे एक नई दुनिया में ले जा रहा था, जो मुझे हर्ष सर के साथ अनुभव नहीं हुआ था।

वो मुझे वाइन पिला रहा था तो दूसरा हाथ धीरे धीरे मेरी चूची की तरफ बढ़ रहा था, उसके होंठ मेरी गर्दन पर थे, उसकी गर्म सांसें मैं महसूस कर रही थी।
मैं आंखें बंद करके उसके अगले मूव का इंतज़ार कर रही थी.. वो जानता था कि मैं पूर्ण समर्पण कर चुकी हूँ फिर भी वो आगे नहीं बढ़ रहा था… एक हद पे जाकर रुक जाता!

मैं बेचैन हो उठी… मैं धीरे से उसकी तरफ घूम गई उसका और अपना गिलास एक तरफ रख कर उसकी आँखों में देखा… ढेर सा प्यार, समर्पण दोनों की आँखों में था!
मैंने उसके पैर के पंजों पर खड़े होकर उसके नशीले होंटों को अपनी होंटों में कैद कर लिया।
‘आह…’ एक मादक आवाज़ दोनों के मुख से सुनाई दी और फिर- उफ्फ्फ राहुल ल ल ल लव मी!

हम दोनों का लिप लॉक काफी देर तक चला- आह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह्ह… चूस लो…. आअ राहुल… आह्ह… आआह्ह्ह मत करो… कुछ हो रहा है हमें… आअह्ह ह्ह राहुल क्या कर रहे हओ?
राहुल के हाथ अब मेरी चूची पर आकर सहलाते हुए हल्के हल्के मसल रहे थे ‘उफ्फ आह्ह…’
मैं चाहती थी कि वो और जोर से दबाए!

फिर राहुल ने मुझे उठा कर पलंग पर लिटाया और मेरे आधे जिस्म के ऊपर आकर लिप किस करने लगा। उसके होंठों को किस करते करते उसके हाथ मेरी रसीले मम्मों को दबाने लगा।
मैने आनन्द से भर कर उसको जकड़ लिया।

राहुल के दोनों हाथ मेरे बदन को सहला रहे थे, मेरी वन पीस ड्रेस को धीरे धीरे उसने ऊपर करना शुरू कर दिया और मेरी चिकनी जांघों पर उसका हाथ… मेरी मादक सिसकारी… ओह्ह्ह रॉ आ हु ल राहुल…
धीरे से मेरी कब वन पीस ऊपर की तरफ होकर मेरे जिस्म का साथ छोड़ गई, पता ही नहीं चला!

अचानक मुझे अहसास हुआ कि मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में हूँ.. मेरा गोरा बेदाग चिकन बदन अब बेपर्दा था… हर्ष सर के बाद राहुल मुझे ब्रा पेंटी में देख रहा था!
मेरे चेहरे पर शर्म की लाली आ गई, गोरा मुखड़ा लाल हो गया, मेरे जिस्म में वो आग फिर से भड़क गई जिसको पिछले 5 साल से मैंने दबा के रखा था।

राहुल फिर मेरे ऊपर छा गया और मुझे धीरे धीरे किस करना शुरू किया, मेरे पैरों को उठा कर मेरे पैरों की एक एक उंगली को चूसना चालू किया तो बदन में उत्तेज़ना की लहर दौड़ गई- उफ्फ आअह्ह राहुललल!
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चूमते चूमते वो ऊपर की ओर बढ़ा और मेरी जांघों को चाटने लगा, चूसने लगा।
‘राहुल लव मी.. ओ ओ ओ आहआह आह यय उफ़!’ मुझे इंतज़ार था कि वो कब मेरी बुर के पास आएगा।
पर वो शैतान बुर के आस पास चूम कर सीधे मेरी नाभि और मेरे सपाट पेट पर आ गया, मैं तड़प कर रह गई।"
"राहुल की जीभ मेरी नाभि के अंदर गोल गोल घूम रही थी, मेरी मादक सिसकारियां गूंज रही थी- ओह राहुल.. आह उफ्फ उफ्फ्फ उफ्फ य या या या आह्ह्ह!
मेरा जिस्म तड़प रहा था और वो शैतान मुझे तड़पा तड़पा कर मजा ले रहा था, मेरे हाथ उसकी बालों को सहला रहे थे, मेरी मादक सिसकारियां ‘आआआ आआऐईईई ईईईई… आआह्ह ऊऊ… ऊऊह्ह्ह ऊओफ…!

उसके हाथ मेरी ब्रा के ऊपर से ही चूची को सहला रहे थे, मेरे निप्पल उत्तेज़ना में खड़े हो गए.. उसका निप्पल को जोर से मसलना मेरे जिस्म में करेंट सा दौड़ा देता था- ओह्ह इ ई ई ई आह उफ्फ्फ! लगती है यार… धीरे से!
पर राहुल तो शैतान था, वो दर्द देता भी था तो प्यार से… इस दर्द में भी एक मजा था!

राहुल मेरे ऊपर छा गया, मेरे होंटों को चूसने लगा, कभी ऊपर का होंठ तो कभी नीचे का… मेरा पूरा सहयोग था, उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर आकर मुझे पागल कर रही थी तो मैं भी उस आनन्द में खोकर पूरा साथ दे रही थी।

न जाने कितनी देर हम उसी अवस्था में थे, एक दूसरे की लार से पूरा मुँह गीला गीला सा था। अचानक उसकी हाथ पीछे गए और मेरी ब्रा का हुक उसने खोल दिया, ब्रा को निकाल कर एक तरफ फ़ेंक दिया।

मेरी गोरी उजली चूची, गुलाबी चूचुक हल्का गुलाबी एरोला उसके सामने था, राहुल की नज़र उस पर थी, मैंने एक नज़र उसको देखा दोनों की नजरें मिली.. उसकी नॉटी स्माइल से मैंने शर्म से आँखें बंद करके खुद को उसके हवाले कर दिया।

मैं चाहती थी कि वो मेरी चूची को जोर जोर से चूसे, निप्पल को काटे!
पर ऐसा हुआ नहीं..

मैंने देखा तो राहुल अपनी शर्ट उतार रहा था, शर्ट के नीचे कुछ नहीं था, उसकी चौड़ी छाती बालों से भरी मेरे सामने थी… वो मेरे ऊपर झुका और मेरी चूची उसके मुँह में.. मेरी तो एक बारगी सिसकारी छूट गईं- आअह्ह ओह्ह्ह इ ई ई ई ई ह्ह… उईई… ईईई माआआ… माआआ!
मेरे हाथ उसके बालों में चले गए, मैंने सर को चूची पे दबा दिया, मेरी आँखें आनन्द से बंद हो गई, सिर्फ मेरी आवाज़ें और सिसकारी का शोर- आहः उई उई उई राहुल और जोर से चूसो… जान मेरी उफ्फ्फ इ ई ई ई ई मर गई!

कभी वो एक चूची को चूसता तो कभी दूसरी को… कभी निप्पल को काटता तो साथ में हाथ से दूसरे निप्पल को मसल देता। मैं चीख पड़ती दर्द भरे आनन्द से- ईईई लगती ई ई है यार… धीरे से ना… आई माँउफ्फ्फ्फ़ .. धीरे ओह्ह आह!
मेरी बुर से झरना बह रहा था, पेंटी पूरी गीली थी, ऐसा तब था जब उसने अभी तक मेरी बुर पे हाथ भी नहीं लगाया था।

मेरी उत्तेज़ना और मदहोशी का आलम यह था कि मेरा हाथ खुद ही उसकी ज़िप पर चला गया, मैंने ऊपर से ही उसके लंड को पकड़ कर जोर से मसल दिया।
राहुल मेरी इस हरकत पर सिसकारी भर उठा- आअह्ह ओह्ह जान न न न!

मेरे हाथ खुद ही बिजी हो गए, पहले बेल्ट, फिर बटन खुल गए, मेरा हाथ अंदर चला गया, जॉकी के ऊपर से ही मैंने लंड को पकड़ लिया, उसकी गर्माहट ही ऐसी थी कि मेरे मुख से आअह्ह्ह निकल गई, मेरा अंदाज़ा था कि 6 इंच से बड़ा ही होगा!
दूसरा हाथ उसकी गांड को दबा रहा था धीरे से उसकी पैंट और जॉकी को मैंने उतार दिया, उसका नंगा जिस्म मेरे सामने था, उसके लंड के पास काले घुंघराले बाल थे। या यह कहो कि पूरे जिस्म में ही बाल थे पर सेक्सी था।

मैंने धीरे से उसको पलट दिया और उसके ऊपर आ गई और जांघों के दोनों तरफ पैर करके उसकी जांघो में बैठ कर उसकी ऊपर झुक गई और फिर… एक बार फिर मैं उसको और उसके होंटों को चूसने लगी।

उसका लंड मेरी पेंटी से रगड़ रहा था, मेरी बर्दाश्त से बाहर था, मैंने खुद ही अपनी पेंटी उतार दी और राहुल से चिपक गई। उसकी बॉडी की स्मेल और गर्मी से मैं पिघल गई… हम दोनों न जाने कितनी देर एक दूसरे के जिस्म को चूमते रहे थे, काटते रहे थे। जगह जगह मेरे जिस्म पर लाल निशान थे जो राहुल की शैतानी का नतीजा थे।

मैं- राहुल, अब बर्दाश्त नहीं होता! कुछ करो न! मुझे तुम चाहिए, आओ न मेरे ऊपर!

कहानी जारी रहेगी।"
"अब तक:
राहुल का लंड मेरी पेंटी पर रगड़ रहा था और मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, मैं अपनी पेंटी उतार कर राहुल से चिपक कर बोली- राहुल, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा! कुछ तो करो! मुझे तुम चाहिए, आ जाओ ना मेरे ऊपर!
अब आगे:

राहुल ने भी मेरी उत्तेजना को समझा, वो मेरे ऊपर आ गया, मैंने भी अपने पैरों को खोल कर उसका स्वागत किया, उसने अपने को सेट करके अपने लंड को पकड़ कर मेरी बुर की लकीर पे रख दिया।
मेरे मुँह से आनन्द भरी सिसकारी निकल ही गई- आअह ह्ह्ह आआह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्ह उम्म ममहह!

राहुल का लंड मेरी बुर की लकीर के बीच में रगड़ने लगा, मेरी बुर के रस से उसका लंड चिकना हो गया… उसका टॉप हल्का गुलाबी सा मेरे रस से चमकने लगा और मैं उसको कुछ करने को कह रही थी।
पर राहुल मुझे तड़पाने में लगा था।

जैसे ही मेरी बुर की लकीर पर रगड़ महसूस होती, मैं अपनी कमर उठा कर लंड को अपनी अंदर समाने की कोशिश करती, उसके चूतड़ को पकड़ कर अपनी तरफ खींचती, पर वो तो जैसे कसम खाकर बैठा था मुझे तड़पाने की… मेरी हर कोशिश नाकाम कर देता!

मेरी बुर से रस बह रहा था, बुर के अंदर और चिकनापन था, राहुल का लंड मेरे रस से गीला हो गया था… मुझसे देरी बर्दाश्त नहीं हो रही थी.. फिर भी मैं आँख बंद करके आने वाले क्षणों का इंतज़ार कर रही थी।

5 साल बाद एक बार फिर मैं उस दर्द और उस आनन्द का इंतज़ार कर रही थी.. मुझे मालूम था इस बार दर्द भी होगा.. चीख भी निकलेगी… आँखों से आंसू भी आएंगे!
पर इन सबके बाद जो आनन्द मिलेगा, मैं उसका अहसास करना चाहती थी जो शायद मैं हर्ष सर के साथ नहीं कर पाई थी।

यही वो पल थे जिनका मुझे इंतज़ार था… मेरी बुर के मुहाने पर गर्म लंड का गर्म सुपारा, बदन में सिहरन… दिल में डर… आँखों में नशा…

राहुल ने लंड को मेरी बुर पर घिसना शुरू किया तो मैंने भी गांड उठा कर लंड का स्वागत किया- राहुल… बहुत तड़पा लिया यार… अब देर ना करो, घुसा दो अपना लंड मेरी बुर में…
राहुल ने मेरी जांघों को मजबूती से पकड़ा और लंड के सुपारे को बुर के मुहाने पर सही से सेट करके थोड़ा दबाव बनाया। सुपारा जैसे ही अन्दर घुसने लगा और बुर फ़ैलने लगी तो साथ में मेरी आँखें भी दर्द से फ़ैलने लगी थी।

और लंड के अंदर जाने का अहसास… मेरा ऐंठ जाना… कमर का उठ जाना पर मैं राहुल की पकड़ से आज़ाद नहीं हो पाई।

राहुल ने थोड़ा सा उचक कर एक धक्का लगाया तो सुपारा बुर का छेदन भेदन करता हुआ बुर में समा गया, मेरे मुँह से घुटी हुई सी चीख निकल पड़ी और मैं एकदम से ऊपर की तरफ खिसकी- आह्ह्ह ह्ह… राहुल… बहुत दर्द हो रहा है…
आखिर मैं भी 5 साल के बाद फिर से सम्भोग कर रही थी मेरी बुर को टाइट तो होना ही था।

राहुल ने मेरी बात को अनसुना कर दिया और उचक कर पहले से थोड़ा तेज एक और धक्का लगा कर लगभग दो इंच लंड और मेरी गीली बुर में सरका दिया।
‘राहुल… छोड़ दो मुझे… मुझे नहीं चुदवाना… फट गई मेरी… प्लीज निकालो बाहर!’ मैं राहुल के नीचे दबी हुई तड़प रही थी, बुर से शायद खून भी टपकने लगा था, मैं दर्द से तड़प रही थी।

पर उस बेरहम ने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला, मेरी जान में जान आई थी कि राहुल ने एक अंतिम झटका दिया मुझे जो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई- अह्ह्ह… ह्ह… उईई… ईईई माआआ… माआआ… मर गईइइइ… आआआअ… ऊऊऊ… उह…
पूरा 6 इंच का लंड मेरी बुर में समा गया, मैं लगभग अचेत सी हो गई थी… आँखों में आंसू आ गए थे… धुंधला सा राहुल का चेहरा मेरे करीब आता दिखा।

राहुल कुछ देर के लिए रुका, पहले उसने मेरी आँखों से निकलते आँसू चाटने के बाद अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। राहुल के रुकने से मेरा तड़पना और मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने उसके होंठ चूसना शुरू कर दिया और फिर उसने चूची को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

सच कहूँ, चूची के चूसने से मेरे दर्द बहुत ही कम हो गया… मेरी बुर खुलने और बंद होने लगी.. मेरी बुर की दीवारों ने लंड को जकड़ के रखा था…
राहुल समझ गया कि वह अब फिर से शुरू हो सकता है, उसने लंड को थोड़ा बाहर की तरफ निकल कर फिर से पूरी ताकत से ज़ोर का धक्का लगा दिया!

‘आआआ आआऐईई ईईई… आआह्ह ऊऊ… ऊऊह्ह ऊओफ्ह… आअह्ह… उम्म्य !’ मेरी चीख फिर निकली पर दर्द बहुत कम हुआ, ऐसा लगता था कि कुछ मेरे जिस्म के अंदर तक चला गया है।

एक बार फिर राहुल ने लंड निकाला…
जो लड़कियां ये पढ़ रही होंगी, वो समझ सकती हैं कि 5 साल के अंतराल के बाद पुनः सम्भोग करना वैसा ही होता है जैसा पहली बार करना, आप सब मेरी चीख को मेरा आनन्द, मेरा दर्द, कुछ भी समझ सकते हैं।"
"फिर एक बार लौड़ा मेरी बुर के छेद को चौड़ा करता हुआ अंदर घुस चुका था, ‘बहुत मज़ा आएगा!’ यह कहते हुए फिर लौड़ा बाहर खींचा और फिर से एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया।

‘अह्ह्ह… ह्ह… उईई… ईईई माआ रा हुलल आ… माआआ… मर गईइइइ… आआआअ… ऊऊऊ… उह… ओह्ह… आह्ह… उम्म… आह्ह… ओह्ह्ह… आअह्ह्ह ह्ह्ह राहुल…’

मेरी बुर रस छोड़ रही थी और मेरी बुर का गीलापन लंड को अंदर बाहर आराम से कर करने लगा… अब दर्द नहीं, आनन्द था, मुझे चुदवाने में बहुत मजा आने लगा और बुर बहुत गीली हो गई, मैं भी अब चूतड़ उचका उचका कर खूब मजा लेकर चुदवा रही थी, मेरी बुर ने इतना रस छोड़ दिया था, वो इतनी गीली हो गई थी कि जब लंड अंदर-बाहर हो रहा था तो फच फच फच की मस्त आवाजें आने लगी।

‘आह राहुल… जोर से आआह्ह उफ़्फ़ फ़्फ़ जानन न…’ अब उसने मेरे एक चूची पर कस कर एक चांटा मारा, दर्द से मेरी चीख निकल गई- उईई.. इ ई ई लगती है राहुल…

उसके चांटे से मेरी गोरी चूची का रंग बदल कर गुलाबी हो गया पर अब मैं भी बहुत ज़ोर ज़ोर से चूतड़ उछाल उछाल कर उसका साथ देने लगी- आआआअ… ऊऊऊ
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कमरे में मेरी सिसकारियों का शोर… ‘हम्म्म्म आ आआ रा हू ल ल ल आआआअ… ऊऊऊ… उह… ओह्ह… आह्ह… उम्म्म… आअह्ह ह्ह्ह राहुल… आह्ह… आआह्ह्ह…’ जांघों से जांघों का मिलन ‘थप थप थप.. की आवाज़ का शोर… अब मैं भी बहुत ज़ोर ज़ोर से चूतड़ उछाल उछाल कर राहुल का साथ देने लगी, तभी राहुल ने लंड निकाल कर मुझे पेट के बल लिटा दिया मेरे चूतड़ों को थोड़ा उठा कर एक बार फिर पूरा लंड एक बार में ही डाल दिया।

यह बदमाशी राहुल की, मेरी चीख निकलवा दी- आह्ह उफ्फ्फ राहुल… हाँ यस यस.. उफ्फ्फ धीरे रे रे रे मर र र गई ई ई एई
राहुल ने मेरे चूतड़ पर कस कर एक चांटा मारा फिर मारा… और फिर मारा।

मैं दर्द से बिलबिला गई… चांटों से मेरे चूतड़ो का रंग बदलने लगा- मत करो कुछ हो रहा है हमें… आअह्ह ह्ह्ह राहुल क्या कररहे हओ? आह्ह… चोदो… राहुल… बहुत मजा आ रहा है… चोदो… जोर से चोदो… फाड़ दो… आईईई.. उम्म्म…मुझे चोदो जोर से… और जोर से…

मैं मस्ती में बड़बड़ा रही थी और राहुल मेरी कमर को पकड़े जोर जोर से धक्के लगा कर मेरी चुदाई कर रहा था। सच कहूँ तो बहुत दिनों बाद.. या यूँ कहो कि 5 साल के बाद ऐसा आनन्द मिला था कि मैं तो एकदम जन्नत का मजा ले रही थी।

इस दौरान मैं कम से कम तीन बार झड़ चुकी थी पर राहुल था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरी बुर में हल्का हल्का दर्द होने लगा था। करीब दस मिनट बाद मैं फिर झड़ने को आई, तब मैं बोली- राहुल और तेज… और तेज… फाड़ दो मेरी बुर को!

यह सुन कर राहुल ने स्पीड बढ़ा दी और बोला- मेरा भी होने वाला है… कहाँ निकालूँ?
मैंने कहा- अंदर… मेरे सेफ दिन हैं!
और मैं कुछ देर में एक जोर की चीख के साथ झड़ गई, राहुल ने भी साथ ही साथ मेरी बुर को अपनी लावा से भर दिया, मेरी बुर में रह रह कर उसका लावा गिर रहा था।

राहुल भी मेरे ऊपर ऐसे गिरा कि उसमें कोई जान ही न हो!
बहुत देर तक हम दोनों वैसे ही अपनी सांसों को व्यवस्थित करने में लगे रहे… मेरे हाथ राहुल के बालों में कंधी की तरह घूमते रहे, मेरे दिल में सम्पूर्णता का अहसास था जो मुझे हर्ष सर के साथ नहीं हुआ था।

राहुल मेरे बगल में लेटा था, मेरा सर उसकी छाती पर था और वो बहुत प्यार से मेरे जिस्म को हल्का हल्का सहला रहा था, बीच बीच में मेरे बालों पर चूम लेता।
हम काफी देर तक वैसे ही एक दूसरे की बाँहों में थे।

थोड़ी देर बाद हम दोनों फ्रेश हुए, मैंने बाथरोब ही पहन रखा था और राहुल ने भी…
राहुल- रिचा, सॉरी यार, मेरे से कण्ट्रोल नहीं हुआ!
मैं- नहीं राहुल, इसमें सॉरी की कोई बात नहीं है, मैं भी दिल से तैयार थी इसके लिए… मैं जानती थी कि ये सब होगा, मेरी भी मर्जी थी तुमने तो बहुत कण्ट्रोल किया, मैं न पहल करती तो तुम शायद इतना आगे न जाते… मुझे तुमको फील करना था।

राहुल- फिर भी…
ऋचा- नहीं राहुल… मैंने हर्ष सर के साथ नादानी में किया था जो मेरी भूल थी पर आज मैंने सोच समझ कर दिल से किया है तभी शायद दिल से अपने आपको तृप्त महसूस कर रही हूँ। थैंक्स टू यू राहुल!

कहानी अगले भाग में समाप्त होगी।"
"मैं- मैंने हर्ष सर के साथ जो किया था, नादानी में किया था, मेरी भूल थी पर आज तो मैंने सोच समझ कर अपने दिल से किया है तभी शायद मैं दिल से खुद को तृप्त महसूस कर रही हूँ। थैंक्स यू राहुल!
कह कर मैंने उसके होंटों को चूम लिया, वो भी मुझे बाँहों में भर कर मेरे होंटों को चूमने लगा, मैंने भी उसका पूरा साथ दिया, मेरी भी आवाजें निकालनी शुरु हो गई- आह… आह… आ… उफ़… उफ़… ईइ… आह… आ अब बस भी करो… राहुल!

राहुल- सच में बस करूँ या?
मैं- नहीं, तुम मत रुको, मेरा और मन है।
कह कर मैं उससे लिपट गई।

हमारे बाथ रॉब अब हमारे साथ नहीं थे, एक बार फिर हम उसी बिस्तर पर प्राकृतिक अवस्था में थे। हम फिर आलिंगन बद्ध हो गये, मेरी गोरी चूची उसकी छाती पर गुदगुदी कर रही थी, राहुल के दोनों हाथ मेरी पीठ सहला रहे थे।

फिर उसके हाथ चूतड़ों की ओर सरक गए, मैंने भी इस बार शर्म त्याग कर अपना एक हाथ से उसके लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी थी, मैं कभी आण्डों को मसल रही थी, दूसरा हाथ से उसके बालों में फेर कर उसके होटों से होंट लगा कर चूमने लगी, फिर मेरे मुंह में अपनी जुबान डाल दी उसका मस्त स्वाद वाला थूक मेरे मुँह में घुल गया। मैं जुबान को उसकी जुबान लपेट कर अपने मुँह में ले गई और लॉलीपॉप के जैसे चूसने लगी।

राहुल तो पागल हो गया था… उसने मुझे अलग करके मेरा मुँह नीचे की तरफ कर दिया, मैं समझ गई कि वो क्या चाहता है… मैंने उसके लंड को पकड़ कर उस पर हल्के से अपनी जीभ फिराई तो राहुल की सिसकारी छूट गई- आ आ आह आह!

फिर धीरे से मैं पूरे लंड को मुँह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूसने लगी, मेरे चूसने से पूरा लंड गीला हो गया और राहुल तो जोर जोर से सिसकारी भर रहा था- इइ इइ उम्म्ह… अहह… हय… याह… और जोर से.. इइ आह ओह्ह्ह ऋचा वाओ… ऐसे ही और जोर से.. आह्ह उफ्फ बस मेरी जान जान रुक जा!
पर मैं रुकने को तैयार नहीं थी, बहुत दिन बाद इतना प्यारा सा लंड मिला था।

राहुल भी मेरे बालों को पकड़ कर मेरा मुँह चोदे जा रहा था, अचानक उसकी स्पीड बढ़ गई, मैं भी समझ गई कि वो रुक नहीं पायेगा, मैं लंड को मुँह से निकाल कर हाथ से हिलाने लगी, कुछ ही पलों में राहुल के लंड से गाढ़े रस की बौछार मेरे जिस्म पर होने लगी। मैं तब तक लंड हिलाती रही जब तक उसकी अंतिम बूँद भी न निकल गई।

राहुल की सांसें अनियंत्रित थी… वो बिस्तर पर गिर सा गया… मैं उसके लंड और अपनी जिस्म को टॉवल से साफ करके उसकी बगल में लेट कर प्यार से उसकी चौड़ी और बालों से भरी छाती सहलाने लगी।
थोड़ी देर में राहुल को कुछ होश आया तो उसने आँख खोल कर मेरी तरफ ऐसे देखा जैसे मुझे शुक्रिया अदा कर रहा हो… प्यार से मेरे होंटों को चूम लिया।

अब राहुल की बारी थी…

राहुल एक बार फिर मेरे ऊपर छा गया… मेरे होंटों को चूसने लगा, मेरे जिस्म ने फिर से जान आने लगी… कभी गर्दन तो कभी कान के लौ, तो कभी चूची… ऐसी ही वो चूसता रहा, चूमता रहा, काटता रहा मैं बस उन पलों का आनन्द ले रही थी, मेरी आंखें खुमारी से बंद थी- आह… उई आह्ह… सी.. सी उई आह.. ओह!

राहुल को मेरे यौवन भरे, मांसल, छरहरे और गदराये हुए स्तन बहुत मादक लगे। मेरे अहंकारी चुचूक उसको निमंत्रित भी कर रहे थे और चुनौती भी दे रहे थे।
मेरी बुर फड़कने लगी थी, लंड मांग रही थी पर मैं जानती थी कि राहुल अभी और कुछ चाहता है.. मैं चाहती थी कि वो मेरी बुर को चाटे!

वो धीरे धीरे नीचे आ रहा था, उसने मेरी चूची को प्यार से दबा कर अपने मुँह में भर लिया, किसी बच्चे की तरह उसको चूसने लगा।उसकी जीभ मेरे चूचुक पर गोल गोल घूम रही थी, वो चूचुक को जोर से काट रहा था और मैं सिर्फ दर्द से आनन्द से पूरा दम लगा कर चीख रही थी- उईई… माँ मर गई माँ! हाय… हाय… माँ, ये राहुल मेरी आज जान ले कर ही रहेगा!

मेरी बुर के अन्दर बहुत ही गुदगुदी और हलचल शुरू हो गई थी! मेरी इच्छा हो रही थी कि मैं अपनी बुर में कुछ डाल कर उस गुदगुदी और हलचल को शांत करूँ।

राहुल एक स्तन को चूसते हुए, अपने एक हाथ से उसके दूसरे स्तन को मसलने लगा तथा अपने दूसरे हाथ से मेरी बुर की मसलने लगा!
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पहले तो उसने बुर के होंठों को मसला फिर मेरी बुर की भगनासा को उँगलियों से रगड़ा और उसके बाद दो उंगलियाँ मेरी बुर के अंदर बाहर करते हुए मेरे जी स्पॉट को सहलाया!"
"जब उसकी उंगलियाँ बुर के अन्दर गई तब मुझे महसूस हुआ लेकिन जैसे ही जी-स्पॉट को सहलाना शुरू किया तो मैं बहुत अधिक उत्तेजित हो गई, अपने कूल्हे उठा उठा कर बहुत ही ऊँची आवाज़ में लम्बी लम्बी सिसकारियाँ लेने लगी- इइ इ इ आह्ह्ह… आआ… ह्ह्ह और जोर से.. इइ आह… आआह आ… आईईईईए… आईई!

फिर वो मेरे पैरों के बीच में आकर मेरी बुर को सहलाने लगा, कभी मेरी भगनासा सहलाता तो कभी मेरे दाने को मसल देता, मैं आनन्द से भर कर सिसकारी लेती- उफ़्फ़ आआआह्ह राहुल लल ओह्ह्ह आअह्ह!

वो कभी बुर में अपनी जीभ डालता तो कभी बुर अन्दरूनी होंठ चूसता लेकिन जब वह छोले पर जीभ चलाता तो मेरी बुर के अंदर अजीब सी गुदगदी होती और मुझे लगता कि मैं स्वर्ग में पहुँच गई हूँ।

हम दोनों इस चुसाई से उत्तेजित हो गए थे और हमारे दोनों के मुँह से उंहह्ह…. उंहह्ह्ह्… और आह.. आह्ह्ह… की आवाजें निकलने लगी थीं। मेरा तो यह हाल था कि मेरी बुर का पानी भी निकलने लगा था, जिसे वो बड़े मजे से पी रहे था।

‘ऊईई… मम्म्मीईइ… राहुल… ऊआह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है मैं मर गई… आह्ह्ह… ऊओईईइ… ह्हीईइ… य्याआया…! कहते हुए मेरा शरीर अकड़ गया, मैंने उसके सिर के बालों को नोच लिया, अपनी जाँघों को जोर से भींच लिया और जोर की किलकारी के साथ मैं ढीली पड़ती चली गई और उसके साथ ही मैंने सारा कामरस निकल दिया जिसे राहुल भला कैसे बेकार जाने देता, गटागट पी गया।

मैं थक सी गई थी पर राहुल अभी मेरी बुर को चाट रहा था, मेरे अन्दर फिर से ऊर्जा भरने लगी… अब मैंने भी उसको अपने ऊपर खींच लिया, अब हम दोनों ही 69 में थे और एक दूसरे को चूस लेना चाहते थे, पर मेरी बुर लंड चाह रही थी।

मैं राहुल को बिस्तर पर गिरा कर उस पर सवार हो गई और उसके लंड पर अपनी बुर रगड़ने लगी।
राहुल मजे से सिसकारी भर रहा था- ह्म्म्म आअह्ह ओह्ह जाआन आह्ह!

मैंने अपने को उसके लंड पर ठीक से लिया और एक बारगी उसपर बैठ गई… हम दोनों की एक आआ आआआ आ आ आह आह… की सिसकारी निकल, उसने मेरे चूतड़ों को पकड़ लिया कस कर, मैं उछलने लगी… राहुल के हाथ भी मेरे को उछाल रहे थे- इइ इ इ आह्ह्ह… आआ… ह्ह्ह और जोर से.. इइ आह…

राहुल थोड़ा उठ कर मेरी उछलती चूची को मुँह में भर कर चूसने लगा।
‘आआह आ आआह…’ मैं हर बार सिसकारी भरती!

राहुल नीचे से धक्के लगा रहा था और मैं ऊपर से… उसका लंड मुझे अंदर तक महसूस हो रहा था।
मैं थक सी गई थी, मेरा बुर का रस कई बार निकल चुका था पर वो था कि निकलने को तैयार ही नहीं था।
मैं बोली- मैं थक सी गई हूँ!

राहुल ने मुझे वैसे ही लिपटा कर धीरे से मुझे लिटा दिया, अब राहुल मेरे ऊपर था और लंड बुर में अब राहुल ने धुंआधार स्पीड से मेरी बुर पर वार करना शुरू कर दिया था, उसके हाथ मेरी चूची को मसल रहे थे और लंड मेरी बुर को…

हम दोनों ही हार मानने को तैयार नहीं थे, दोनों पसीने में लथपथ हो गए थे पर जोर दोनों लगा रहे थे एक दूसरे पर विजय पाने की! ‘उऊऊँऊँ ..ऊँ…ऊँ… हहुहु हुँहुँ.. हुँ…हुँ… उउउउ.. उ…उ…ह…’ राहुल धक्के लगाते हुए मेरे होंठों को बुरी तरह चूस रहा था। मेरे होंठों को राहुल ने अपने मुँह में लेकर बंद कर रखा था मगर फिर भी उत्तेजना के कारण मेरे मुँह से उँहु…हुँ…हुँ.. उँह…हुँ…हुँ… उँह…हुँ…हुँ… की आवाज निकल रही थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से राहुल के कंधों को पकड़ लिया और उत्तेजना के कारण मेरे मुँह से इईशश..श…श… अआआहहा.. हाँ…हाँ… इईशश..श…श… अआहहा.. हम्म…हाँ… की मादक सिसकारियाँ निकलने लगी, राहुल का जोश दोगुना हो गया और वो तेजी से धक्का लगाने लगा।

मेरी भी साँसें तेज हो गई और सिसकारियों की आवाज बढ़ गई, पूरा कमरा मेरी सिसकारियों और हम दोनों की साँसों की आवाजों से गूंजने लगा।

धीरे धीरे मेरा मजा बढ़ता गया और कुछ देर बाद मेरे पूरे शरीर में आनन्द की एक लहर दौड़ गई, मेरे हाथ पैर राहुल की कमर से लिपट गये और मेरे चूतड़ अपने आप ऊपर उठ गये, मेरे मुँह से इईशश..श…श… अआहह..ह…ह… की जोर से आवाज निकली और मैं अपनी बुर से ढेर सारा पानी छोड़ते हुए शांत हो गई।

कुछ देर राहुल भी चरम पर पहुँच गया, उसने मेरे शरीर को कस कर पकड़ लिया और अआह प..आ… य…अ…ल.. इईशशश.. श…श… मेरी ज.आ..न… कह कर लंड का ढेर सारा गर्म वीर्य मेरी बुर में उड़ेल दिया।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी बुर में कोई गर्म लावा फ़ूट पड़ा हो जो मेरी बुर से रिस कर मेरी गांड छिद्र पर भी बहने लगा और राहुल भी शांत हो गया था।

काफी देर तक हम दोनों वैसे ही एक दूसरे की बाँहों में रहे, फिर न जाने कब आँख लग गई।"
"तभी मेरी आँख मेरे मोबाइल की रिंग से खुली, मेरे घर से फोन था, मेरी माँ ने कहा- देर बहुत हो गई है, तुम वहीं रुक जाओ, अब सुबह आना!
मेरा मन मयूर तो ख़ुशी से नाच उठा, मैंने राहुल को बाहों में लिया और चिपक कर सो गई।

फिर हमने सुबह करीब 5 बजे एक और दौर चुदाई का किया, खूब बातें की, फिर मैं नहा कर फ्रेश होकर ब्रेकफास्ट के बाद सुनहरी यादें ले कर अपने घर आ गई… सारा समय मैं यही सोचती रही कि इस मिलन में क्या ऐसा खास था कि मैं अंदर से तृप्त महसूस कर रही थी।

एक ही बात मेरे दिलोदिमाग में आ रही थी, वो था ‘प्यार’
सच कहूँ, अगर हम दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए प्यार नहीं होता तो यह भी मिलन भी हर्ष सर के साथ जैसा ही होता।

शाम को हम फिर मिले, साथ में रोमांटिक डिनर किया, राहुल को एयरपोर्ट ड्राप करते हुए मैं वापस घर आ गई।

करीब दो घंटे बाद ही राहुल का मैसेज आया ‘बहुत मिस कर रहा हूँ तुम्हारे साथ बिताये पल!’
मैंने भी उसको रिप्लाई किया ‘मेरा भी कुछ यही हाल है!’

दोस्तो, यह थी मेरी और ऋचा की एक छोटी सी मुलाकात!
आशा है आप सबको पसंद आई होगी और आप सबने बहुत एन्जॉय भी किया होगा।

आपके दिल में, कल्पना में कोई न कोई ऋचा या राहुल होगा, आप जिसको देखते हुए आप ऐसी ही कुछ कल्पना करते होंगे!

फिर भी आप के दिल में जो भी सुझाव या फिर आपकी कोई कल्पना हो जिसे आप बताना चाहते हो, मेरे ईमेल द्वारा आप संपर्क कर सकते है… फेस बुक, हैंगआउट, पर भी विचार प्रकट कर सकते हैं।

हर किसी को अपने तरीके से जीने का हक़ है.. अपनी इच्छाओं को दबाओ नहीं बल्कि भड़काओ क्योंकि आपका अपना अस्तित्व है, वज़ूद है।

आप सब का शुक्रिया मेरी कहानी पढ़ने के लिए।
आपके अमूल्य विचारों को जानने को उत्सुक हूँ मैं!
आप भी यदि कोई सीक्रेट कोई शेयर करना चाहते है या मेरे से कोई सहायता चाहते/चाहती हैं तो मेरे ईमेल पर आप संपर्क कर सकते/सकती हैं।
कृपा करके आप फालतू के मैसेज भेज का अपना और मेरा समय बर्बाद न करें।"

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